image

जय गुरु।

जब कोई चित्रकार कैनवस पर चित्र उकेरता है तो वो वास्तव में यह कैसे करता है? कोई भी कलाकार हो वो आपको एक ही बात बताएगा की वो तो बस विचरों को पड़ने में अच्छा है। एक अच्छा कवी तो बस अपने विचरों का द्रष्टा मात्र होता है, रचनात्मक विचार तो स्वयं आते है। लेखक तो सिर्फ़ विचरों का द्रष्टा होता हैं जो अपनी कलम से उन्हें लिख देता है, सृजन करना तो प्रकृति का गुण है और हम प्रकृति के अधीन है। इसलिए वास्तव में जो सृजनात्मक कार्य हो रहे हैं उसमें हम केवल एक माध्यम हैं और यदि कोई कर्ता है तो वो प्रकृति है।

एसा क्यों होता है कोई किसी कला में माहिर हो जाता और कोई बहुत प्रयत्न करने के बाद भी कुछ नहीं सीख पाता? यदि ज्ञान सबके लिए एक है तो कुछ लोग उसे सीखने में असफल क्यों रह जाते हैं? अब आप कहेगें की गॉड गिफ्ट (God Gift) भी कोई चीज़ होती है, बिलकुल यहीं सच है। जिसे हम गॉड गिफ्ट मानते हैं वो उन कुछ लोगों की छुपी हुई प्रतिभा है जिसे वें प्रकृति या मन की आवाज़ और लोगों से बहेतर सुन पते है। इसी को द्रष्टा भाव भी कहते ही, मन की आवाज़ को सुन कर उसे अमल में लाकर वे लोग सफ़लता की सीढ़ी बहुत जल्दी चढ़ जाते हैं। अल्बर्ट आइंस्टीन इसे intuition सहज बोध कहते थे। आप उन्हीं के शब्दों में पड़ले।

“The intellect has little to do on the road to discovery. There comes a leap in consciousness, call it Intuition or what you will, the solution comes to you and you don’t know how or why.” Albert Einstein

उनके इस वाक्य को मैंने हिंदी में लिखनें की कोशिश की है:

“नई ख़ोज करने में बुद्धि का योगदान ना के बराबर होता है। समस्यों का हल आपके पास स्वयं आ जाता है इसे चेतना का विस्तार कहें या सहज बोध। यह कैसे और क्यों होता है बता पाना मुश्किल है।” अल्बर्ट इंस्टीन

सामान्य ध्यान की क्रिया में हम अपने विचरों पर नज़र रखना सीखते हैं, विचरों में न खोकर हम उनके द्रष्टा बन कर रहना सीखते है, यह एक प्रकार का मैडिटेशन (mediation) है जो कोई भी कर सकता है। यदि ये बचपन से किया जाए तो हम द्रष्टा भाव से मन पर नज़र रखना बहुत जल्दी सीख सकते है और प्रकृति हमसे क्या करना चाहती है वो जान कर हम भाग्य का साथ भी पा सकते हैं। जब प्रकृति से हमारा विरोध नहीं होगा तब भाग्य भी आप का साथ देगा। इस विषय में अल्बर्ट इंस्टीन के विचार पड़ने योग्य हैं:
Everything is determined, the beginning as well as the end, by forces over which we have no control. It is determined for the insect, as well as for the star. Human beings, vegetables, or cosmic dust, we all dance to a mysterious tune, intoned in the distance by an invisible piper.”
― Albert Einstein

“सब कुछ पूर्व निर्धारित होता है, शुरुवात से लेके अंत तक सब कुछ उन शक्तियों के द्वारा होता है जिन पर मनुष्य का कोई नियंत्रण नहीं होता है। चाहे वो कोई कीड़ा हो, तारा हो, मनुष्य हो, सब्ज़ी हो या फिर धूल, सभी उसकी बाँसुरी से निकली धुन पर नाचते है, वो जो अदृश्य है।”
–अल्बर्ट इंस्टीन

तो आपने जाना की विचरों के प्रति द्रष्टा भाव विकसित करने से हम प्रकृति के संकेतो को सुनने की विशिस्ट कला सीख जाते है। जो काम प्रकृति हमसे करना चहती है उसे बिना किसी विरोध के हो जाने देते है। कर्ता भाव से मुक्त होकर प्रकृति के भरोसे हम सभी चिंताओं से मुक्त हो कर शांति पूर्ण जीवन व्यतीत करते हैं। मश्हूर वैज्ञानिक अल्बर्ट इंस्टीन ने अपने जीवन को इसी सहजता से जी कर दिखाया, उन्होंने प्रकृति द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को आसानी से प्राप्त कर लिया और अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा दिया।

अजित वर्मा।

Advertisements