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लेखकः अजित वर्मा।

चिल्ला चिल्ला कर अपनी बात सुनाता, सबको अपने होने का अहसास दिलाता। घर में छोटा होकर के भी सबको अपना जोश दिखाता, युवा खून का जोश तो देखों, ना कहने पर वो बाप से भिड़ जाता है।

युवा खून में जोश बड़ा, की उसको लिखनी नई कहानी है। हरदम होता बेचैन बड़ा की उसको किस्मत बनानी है।

क्या खून में जवानी होती है, की ये उम्र में ही रवानी होती है। एक दूजे का हाथ पकड़ कर, चड़े वीर जब कारगिल पे, झूम उठे पर्वत वतन के नारों से, जब लाकर रख दी जीत वतन की मुट्ठी में।

युवा खून में जोश बड़ा, की उसको लिखनी नई कहानी है। हरदम होता बेचैन बड़ा की उसको किस्मत बनानी है।

एक तरफ युवा शहीद भगत सिंह, हँसते हँसते बली चढ़ जाते हैं। फिर कौन हैं वो जो युवा कहलाते, अबला निर्भया के बलात्कारी बन जाते। आज के युवा तुम होश में आओ, यूँ ना अपनी छवि बनाओ, अपने अंदर तुम ममता जगाओ। हर नारी का सम्मान बनो तुम, भारत माँ की आन बनो तुम।

युवा खून में जोश बड़ा, की उसको लिखनी नई कहानी है। हरदम होता बेचैन बड़ा की उसको किस्मत बनानी हैं।

जोश में होश न खोना तुम, की हरदम उत्तेजित न होना तुम।अपने लिये थोड़ा वक़्त निकालो, चुप होकर बैठो शांत ज़रा, सासों पे रख के ध्यान ज़रा, मन को कर लो शांत ज़रा।  चुप रहकर इस सन्नाटे में, फ़िर से कर लें मूल्यांकन ज़रा। शान्ति की दौलत को पहचान ज़ार, अपने लक्ष्यों में झांक ज़रा। शान्ति ही सच्ची पूँजी होती है, इस बात को तू पहचान ज़रा।

युवा खून में जोश बड़ा, की उसको लिखनी नई कहानी है। हरदम होता बेचैन बड़ा की उसको किस्मत बनानी हैं।

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