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मुझको उठाकर लिख देते हो कुछ भी,
स्याही से बना कर शब्दों की जलेबी,
चाश्नी सी मीठी ये शब्दों की इमरती,
लज़्ज़त बढाती है कविता तुम्हारी,
हर रचना में मैं हूँ साथी तुम्हारी,
जीवन का रस शब्दों में मिलाती,
कागज़ पर परोसू कल्पनाओं की रंगोली,
हर अक्छर में भर के संवेदनाए तुम्हारी,
लिख देती हूँ शब्दों में कहानी तुम्हारी,
हर रचना में साथी मैं कलम तुम्हारी।

लिखो तुम कुछ भी कविता या कहानी,
हाथ पकड़ कर बनी हूँ सहारा तुम्हारी,
लाखों कविताएँ है मुझमें समाई,
स्याही में घुली हैं न जाने कितनी कहानी,
बनालो तुम मुझको अपनी सहेली,
शब्दों को रच दूँगी भावनाओं से तुम्हारी,
लिखूंगी जब बन के कलम तुम्हारी,
जीवंत कर दूंगी हर रचना तुम्हारी,
खून से लिखकर कहानी तुम्हारी,
हर रचना में साथी मैं कलम तुम्हारी।

लेखक अजित वर्मा।

Written by Ajit Kumar Verma. 2 May 2016

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