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आज सादगी से वो सजे है,
मुस्कुराकर कितने सितम किये है,
इन लाल ओंठो से न जाने,
कितनो के क़त्ल किये है।

है बड़ी ताकत सृंगार में उनके,
इस रूप की तपिश में हम बहुत जले,
यह अगर सादगी है आपकी,
कातिल अदाओं के आगे क्या टिकेंगे?

आपकी सादगी में क्या बात है,
चुप रहकर भी क़ातिलाना अंदाज़ है,
शुक्र है की नज़रो पे चश्मा है,
आपके आगे तो मेरा हर रंग फीका है।

कहने को और बाकि क्या है,
आप को देख हाल हुआ ऐसा,
पहले तो हर लम्हा था तनहा,
अब तो हर लम्हें में,
ज़िक्र है, तो सिर्फ आप का।

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