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जीवन है तेरी, कविता मेरी,
पानी पर बैठी छाया तेरी,

लुक छुप लुक छुप खूब सताए,
दिखते दिखते ओझल हो जाए,
मन्द मन्द तू क्यों मुस्काये,
पुरवइया संग झिलमिल गाए,

दूध मलाई से तेरी काया,
पूर्णिमा सा योवन छाया,
बिन्दिया बन जग में चमके,
रौशन रौशन अँधेरी गलियां,

सुंदरियों सी कोमल काया,
फिर क्यों बोलें चंदा मामा,
बदरा बदरा घूंघट तेरा,
मुखड़े पे हो जब, बदरा का पहरा,

जीवन है तेरी, कविता मेरी,
पानी पर बैठी छाया तेरी।

अजित कुमार वर्मा।

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