यूँही किसी को भुलाया नहीं जाता, 

अपनों को पराया बनाया नहीं जाता,

यूँही रुख बदल लेती हैं नदिया जैसे,

दुःख न कर ए इंसा, बस इतना समझ ले

किनारों से दिल कभी लगाया नहीं जाता।
लेखकः

अजित कुमार वर्मा।

Image source google

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