जब मैंने खामोशी को सुन्ना सीखा,

मौन में रहकर जीना सीखा,

शून्य से आती आवाज़ों को चीन्हा

सुगबुगाहटों से छनकर आती,

ये मधुर शब्दों की बेला,

हैरत में डाले शब्दों का रेला,

मौन में रहकर मैने यह सीखा,

ख़ामोशी में होता है कविताओं का बसेरा।
लेखक: अजित कुमार वर्मा।

(मौन के साथ मेरा अनुभव)

Written by ajit Kumar verma

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