लोग कहतें है कि हमारी फितरत कवियों सी हो गई है,दिल में अब उदासी की जगह कैफियत ने ली है,अब और दिले-हाल क्या बताएं हम दोस्तों,बस इतना समझ लीजिये,खुदा से दिल लगा बैठें हैं हम,और फरिश्तों से गुफ़्तगू होने लगी है।

मेरे दिल का हल बयान करती यह कुछ पंक्तिया आप को अच्छी लगी हो तो लाइक कर हौसला बढ़ाइए।

धन्यवाद

लेखकः 

अजित कुमार वर्मा।

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